कोई व्यक्ति संगीत गाता है। यह गायन किस प्रकार का हो सकता है? अनेक भेदों से इसके अनेक प्रकार गिनाए जा सकते हैं। परन्तु मुख्य तौर पर हम ये जाने की कुछ प्रकारों में अधिक बंधन होते हैं और कुछ में कम।
कुछ न कुछ बंधन तो होता ही है अन्यथा किसी प्रकार का स्वरूप ही कैसे स्थापित होगा। परन्तु ध्यान देने की बात यह है की आलप्ति एक ऐसा प्रकार है जिसमें कम बंधन होने से एक विचित्र बात देखी जाती है।
वह विचित्र बात यह है की इसमें मन के अंदर अनुभव किए हुए विचार स्वतंत्र रूप से बाहर व्यक्त किए जा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, जैसे किसी राग में कोई गत बजा रहा है। यहां यह होगा की वह बजा तो उसके स्वरों को अनुभव करके ही रहा होगा परन्तु क्योंकि स्वर पहले ही बंध गए हैं तो उसे अनुभव भी वही करने पड़ेंगे। तो यह बंधन है। परन्तु जब इसी राग में आलाप किया जाएगा तब बंधन यह नहीं है की कौनसे निर्धारित स्वर ही कहने हैं। इतना अवश्य है की जो राग है उस के हिसाब से ही स्वर कहने हैं पर क्या कहने हैं और कैसे कहने हैं इसमें बंधन नहीं हैं। अब इस स्थिति में यह होगा की मन के अंदर भाव तो राग के अनुरूप बनेंगे परन्तु यह भाव बाहर प्रकट करने में अब कोई बंधन नहीं है। अब जैसे जिस प्रकार के जिस श्रेणी के जो भी भाव हैं वे ज्यों के त्यों बाहर प्रकट किए जा सकते हैं। यह आलाप है।
मैं समझता हूं यह आलप्ति एक ऐसी शैली है जिसका कोई मुकाबला नहीं कर सकता। क्योंकि निर्धारित न होने से और धीमी गति भी होने से, इसमें व्यक्ति के आंतरिक विचार स्पष्ट बाहर आ जाते हैं। कोई कैसा व्यक्ति है उसके उच्चतम विचार कैसे हैं यह जानना हो तो उसका आलाप सुनना चाहिए। बंधे हुए संगीत में पता लगाना कठिन है, हालांकि उसमें भी पता तो लगता ही है। परन्तु आलाप में तो जैसे सामने आईना रख दिया जाता है, कोई झूठा कुछ व्यक्त कर ही नहीं सकता।
और दूसरी बात यह है की इस माध्यम से अनुभव सबसे अधिक शुद्ध रूप में व्यक्त किया जा सकता है, तब सुनने वाला भी इस अनुभव को सबसे अधिक ग्रहण कर सकता है। इसका ग्रहण बहुत शक्तिशाली हो सकता है। क्योंकि गंभीर विचार सीधा एक श्रेष्ठ व्यक्ति के हृदय से एक जिज्ञासु के हृदय में कंप पैदा करके अपना पूरा प्रभाव छोड़ सकता है। ऐसा होने पर उस श्रोता पर उस विचार का भारी असर हो जाता है।
संगीत में कम स्थिति होने से आलाप न कर पाएं, यह स्थिति बिल्कुल हो सकती है। ऐसा नहीं है की कोई भी आलाप कर सकता है। पर जो कर सकता है उसके लिए यह है की उसके विचार स्पष्ट रूप में व्यक्त हो जाते हैं। तकनीकी तौर पर सही आलाप कर पाना, यह कोई विशेष बात नहीं है। विशेष बात तो एक श्रेष्ठ व्यक्ति के श्रेष्ठ विचार होते हैं जो की आलाप के द्वारा हम अनुभव कर पाते हैं।
लय और ताल की अपनी महिमा है। उसको हम अलग से कहेंगे। पर इतनी बात अवश्य ही समझनी चाहिए की आलप्ति एक विशेष और विचित्र शैली है जो अनुभव को व्यक्त करने में अद्वितीय है।